29 अगस्त 2023

यज्ञोपवीत धारण करने के नियम

 

यज्ञोपवीत धारण करने के नियम



1.       प्रात:काल सूर्योदय से पूर्व उठना।

2.       माता-पिता, दादा-दादी आदि को पैर स्‍पर्श करके नमस्‍ते करना।

3.       अपने से छोटे-बडे भाइयों बहनों को नमस्‍ते करना।

4.       शरीर को स्‍वच्‍छ स्‍नान करना।

5.       प्रार्थना/उपसना करना।



6.       ईश्वर सच्चिदानंदस्वरूप, निराकार, सर्वशक्तिमान, न्यायकारी, दयालु, अजन्मा, अनंत, निर्विकार, अनादि, अनुपम, सर्वाधार, सर्वेश्वर, सर्वव्यापक, सर्वांतर्यामी, अजर, अमर, अभय, नित्य, पवित्र और सृष्टिकर्ता है, उसी की उपासना करने योग्य है।

7.       सदा सत्‍य बोलना।



8.       सदा दूसरों की सहायता करना।

9.       अपने से छोटे बडों का आदर करना।

10.  सब सत्यविद्या और जो पदार्थ विद्या से जाने जाते हैं, उन सबका आदिमूल परमेश्वर है।

11.  वेद सब सत्यविद्याओं का पुस्तक है। वेद का पढना – पढाना और सुनना – सुनाना सब आर्यों का परम धर्म है।

12.  सत्य के ग्रहण करने और असत्य के छोडने में सर्वदा उद्यत रहना चाहिये।

13.  सब काम धर्मानुसार, अर्थात सत्य और असत्य को विचार करके करने चाहियें।

14.  संसार का उपकार करना इस समाज का मुख्य उद्देश्य है, अर्थात शारीरिक, आत्मिक और सामाजिक उन्नति करना।

15.  सबसे प्रीतिपूर्वक, धर्मानुसार, यथायोग्य वर्तना चाहिये।



16.  अविद्या का नाश और विद्या की वृद्धि करनी चाहिये।

17.  प्रत्येक को अपनी ही उन्नति से संतुष्ट न रहना चाहिये, किंतु सब की उन्नति में अपनी उन्नति समझनी चाहिये।

18.  सब मनुष्यों को सामाजिक, सर्वहितकारी, नियम पालने में परतंत्र रहना चाहिये और प्रत्येक हितकारी नियम पालने सब स्वतंत्र रहें।

19.  समय पर भोजन करना।

20.  समय पर खेलना।

21.  समय पर सोना।

08 अगस्त 2023

Welcome Song in Sanskrit

 

स्वागत गीत



अयि ! मान्या महानुभावा ! भवतो वयं नमामः ।

कुलमागतं गुरूणाम् अतिथीन्हृदाचंयामः ॥ १ ॥

निगमोक्त शिक्षणं यत् चिरकालतो विलुप्तम्।

ऋषिणा पुनः प्रदीप्तं व्रतिनो मुदाश्रयामः ॥ २॥

विमलार्य संस्कृतिं स्वां प्रशितार्य सभ्यतान्ताम् ।

उद्धर्तुमत्र यत्नं तपसा वयं विदध्मः ||||

स्वदेशवेशभूषां निजधर्म रोतिनीतिम् ।

सुखदामार्य भाषाम् उदयं वयं नयाम: ||||



कुलवासिनो वयं वः किमिवार्चनं नु कुर्मः ।

श्रद्धामयै: सुभावैः कुसुमैः सुपूजयामः ||||

धन्यं कुलं न आर्या: विदुषां व आगमेन ।

उपदिश्यतां बुधेन्द्रै: वचनामृतं पिबेम ||||




आर्य कवीन्द्र मेधा व्रताचार्यः

07 अगस्त 2023

Sanskrit Songs

 

भारत देशो, विभूषित वेशो, विशेष विलासस्त्रिभुवने विराजते।

मम देशो वेदवाणीं प्रकाशते ........।।

भुवनेषु धूमः शुभगन्धयुतोऽयं, व्याप्नुते हवनाश्रितो ।

विद्यापिपासु ब्रह्मचारी गणोऽयं, राजते च कुले गुरोः ।

आम्र निकुञ्जे-2, कोकिल कूजो गुञ्जति वारं वारम् ।

पश्य शोभा कथं रमणीया, सदा वरणीया वसन्त समागमे ।।

मम देशो वेदवाणीं प्रकाशते ........।।

बहवो बभूवुरिह क्षत्रियवीराः, धार्मिकाः जनपालकाः ।

श्रीकृष्णचन्द्रं रामचन्द्रराघवं को नु बोधति धन्विनम्।

महाभारते -2, युद्धे भीमार्जुनयोर्विक्रम चरितम् ।

वीरभूमे! नमो मातृभूमे! धान्यधनपूर्णे सदाशस्य श्यामले।।

मम देशो वेदवाणीं प्रकाशते ........।।

चरणानि यस्य सततं क्षालयते, दक्षिणादिशि सागरो ।

शैलाधिराजो रमते चोत्तरस्यां, देवतात्म हिमालयो।

गंगा तीरे-2 निर्मल नीरे नृत्यति नौकायानम्।

शीतवातोऽरविन्द सुगन्धं प्रसारयते ऽयं विशाले सरोवरे।।

मम देशो वेदवाणीं प्रकाशते ........।।